मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय (Biography of Munshi Prem Chand)


This article contains a brief biography of great poet and storyteller Munshi Premchand. He holds a prominent place in the field of poem and story writing. He is not famous in India but in the whole world. In this article I have tried to bring out some events of Munshi Prem Chand's lives.

godanसम्राट, महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 में वाराणसी (Varanasi) शहर से करीब चार मील दूर लमही नाम के एक गांव में हुआ था| उनके पिता का नाम मुंशी अजायब लाल था, जो डाक खाने में क्लर्क थे| मुंशी प्रेमचंद जब छह वर्ष के थे तभी एक बीमारी के कारण उनकी माता का निधन हो गया था| प्रेमचंद (Prem Chand) जी को अपनी माँ से बहुत ही लगाव था, इसीलिए जब उनकी माँ का निधन हो गया तो उनके लिए यह कमी गहरी और इतनी तड़पने वाली थी की उन्होंनें अपने उपन्यास और कहानियों में बार-बार ऐसे पात्रों की रचना की, जैसे- जिनकी माँ बचपन में ही मर मर गईं, उनके माँ बाप बचपन में ही बिछुड गए आदि|
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लगभग चौदह वर्ष की आयु में बालक धनपत राय (प्रेमचंद) के पिता का भी देहांत हो गया| ट्यूशन कर-कर के उहोंने किसी तरह मैट्रिक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास की| पन्द्रह-सोलह बरस की आयु में उनका विवाह हो गया था| 1899 से 1921 तक वे मास्टरी के पद पर रहे| नौकरी करते हुए ही उनहोंने बी.ए की परीक्षा पास की| प्रेमचंद को उर्दू और हिंदी दोनों ही भाषाओं में आधुनिक कहानी का जन्मदाता माना जाता है| प्रेमचंद ने लगभग तीन सौ कहानियाँ तथा चौदह सर्वश्रेष्ट छोटे-बड़े उपन्यास लिखे, जिसमें से गोदान, गबन ,सेवासदन, रंगभूमि, मंत्र, कायाकल्प और निर्मला बहुत प्रसिद्ध है|
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प्रेमचंद एक बहुत ही महान लेखक थे| 1935 में वो बहुत ही बीमार पड़ गए और 8 अक्टूबर 1936 को 56 वर्ष की आयु में एक रोग से पीड़ीत हो कर यह महान लेखक इस दुनिया से विदा हो गया| लेकिन अपनी अमूल्य कृतियों और रचनाओं की धरोहर छोड़कर वह हमेशा के लिए अमर हो गए| मुंशी प्रेमचंद की जन्म स्थल पर अब एक स्मारक बना दिया गया है| इस स्मारक स्मारक में एक पुस्तकालय भी है, इस पुस्तकालय में प्रेमचंद द्वारा लिखी पुस्तके राखी गयी है|


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